“સમન્વય”ની સૂરીલી સૃષ્ટીમાં સસ્નેહ સ્વાગત…

या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता
या वीणा  वर  दंडमंडितकरा, या   श्वेत   पद्मासना
या ब्रह्माच्युत शंकराप्रभ्रृतिभि, देवैः सदा पूजिता
सा माम पातु सरस्वति भगवती निःशेष जाड्यापहा ||